• आईसीसी ने क्रिकेट मैचों में 'Stop Clock' नियम को लागू करने का फैसला किया है।

  • टी-20 वर्ल्ड कप 2024 'Stop Clock' नियम लागू होने वाले पहला आईसीसी टूर्नामेंट होगा।

ICC: क्या है ‘Stop Clock’ नियम ? जिसके तहत दोषी पाए जाने पर टीम को मिलेगी कड़ी सजा
आईसीसी ने 'Stop Clock' नियम को लागू करने का फैसला किया है। (फोटो: ट्विटर)

क्रिकेट मैचों में हो रही देरी की समस्या से निजात पाने के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट कॉन्सिल ने ‘Stop Clock’ नियम को मंजूरी दे दी है। हाल ही में दुबई में खत्म हुई ICC की बैठक में यह फैसला लिया गया। जून में होने वाले आगामी टी-20 वर्ल्ड कप 2024 से नियम को लागू कर दिया जाएगा।

गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर 2023 में इसे ट्रायल बेसिस पर लागू किया गया था जिसके परिणाम काफी शानदार निकले। यही वजह रही है कि आईसीसी ने इस नियम को इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों में लागू करना का फैसला किया है। हालांकि, क्रिकेट संस्था ने यह भी साफ कर दिया कि इसे केवल टी-20 में ही नहीं बल्कि क्रिकेट के दूसरे फॉर्मेट वनडे में भी लागू किया जाएगा।

जानिए क्या है ‘Stop Clock’ नियम?

‘Stop Clock’ नियम को क्रिकेट मैचों को पूरा करने में हो रही समय की बर्बादी को देखते हुए लाया गया है। इस नियम के तहत, फिल्डिंग टीम को एक ओवर फेंके जाने के बाद 60 सेकेंड पूरे होने तक दूसरा ओवर शुरू करना होगा। यानी कह सकते हैं कि हर दो ओवरों के बीच में अब महज 60 सेकेंड का समय मिलेगा। इसके लिए टीवी स्क्रीन पर टाइमर चलता रहा जिसमें जीरो आने तक गेंदबाज को अगला ओवर फेंकना शुरू कर देना होगा।

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नियम तोड़ने पर क्या?

अगर फिल्डिंग टीम ने एक या दो बार इस ‘Stop Clock’ नियम को तोड़ा, तो अंपायर वार्निंग देगा, लेकिन इसके बाद नियम टूटने पर बैटिंग साईड के खाते में 5 रन जोड़े जाएंगे और जितनी बार नियम को तोड़ा जाएगा, उसी तरह से बैटिंग साईड के खाते में रन जुड़ते चले जाएंगे। हालांकि, बैट्समैन, डीआरएस के अलावा किसी बाहरी कारणों से मैच में हो रही देरी के लिए मैदानी अंपायर और टीवी अंपायर के पास फैसला लेने की आजादी रहेगी।

नियम की जरूरत क्यों पड़ी?

चाहे क्रिकेट का कोई भी फॉर्मेट हो, ऐसा कई बार ऐसा देखा गया कि फिल्डिंग टीम ओवर फेंकने के लिए ज्यादा समय ले लेती है। जिससे मैच खत्म करने में समय लग जाता है। मैच के बाद भले ही खिलाड़ियों के ऊपर स्लो ओवर रेट का जुर्माना लगा दिया जाता है, लेकिन पैसों की कोई कमी न होने की वजह से यह खिलाड़ियों के लिए ज्यादा चिंता का सबक नहीं था। यही वजह रही कि आईसीसी ने ऐसा नियम लाया ताकि कोई टीम इसे तोड़ती है तो, इसका सीधा फायदा बैटिंग करने वाली टीम को मिल सके।

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