• विदर्भ के युवा बल्लेबाजी सनसनी दानिश मालेवार ने रणजी ट्रॉफी 2025 फाइनल के पहले दिन शानदार खेल दिखाया।

  • उन्होंने नागपुर के जामथा स्थित वीसीए स्टेडियम में केरल के खिलाफ 168 गेंदों पर शानदार शतक बनाया।

विदर्भ के दानिश मालेवार ने रणजी ट्रॉफी 2025 फाइनल में केरल के खिलाफ ठोका शतक, फैंस खुशी से झूमे
Danish Malewar (Image Source: X)

विदर्भ के युवा बल्लेबाज दानिश मालेवार ने रणजी ट्रॉफी 2025 फाइनल के पहले दिन बेहतरीन खेल दिखाया। नागपुर के वीसीए स्टेडियम में केरल के खिलाफ उन्होंने 168 गेंदों में शानदार शतक जमाया।

दानिश मालेवार के शतक से विदर्भ केरल के खिलाफ रणजी ट्रॉफी 2024-25 के फाइनल में पहुंचा

21 साल के दानिश तब बल्लेबाजी करने आए जब उनकी टीम मुश्किल में थी। सिर्फ 12 ओवर में विदर्भ ने 24 रन पर 3 विकेट गंवा दिए थे। पिच हरी थी और तेज गेंदबाजों को शुरुआत में काफी मदद मिल रही थी। मालेवार के शतक ने न सिर्फ पारी संभाली, बल्कि रणजी ट्रॉफी 2025 फाइनल में विदर्भ को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।

कप्तान अक्षय वाडकर की अगुवाई में विदर्भ ने नई गेंद का सामना करने के लिए अपनी बल्लेबाजी क्रम में बदलाव किया था। उन्होंने निचले क्रम के बल्लेबाज पार्थ रेखाड़े और दर्शन नालकंडे को ऊपर भेजा, ताकि वे नई गेंद को खेलकर मध्य क्रम के लिए स्थिति आसान बना सकें। लेकिन यह रणनीति काम नहीं आई, क्योंकि केरल के तेज गेंदबाजों ने पिच का पूरा फायदा उठाकर पहले सत्र में ही 3 विकेट चटका दिए। जब टीम को एक मजबूत साझेदारी की जरूरत थी, तब चौथे नंबर पर मालेवार क्रीज पर आए। उन्होंने पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी कर रहे अनुभवी करुण नायर के साथ मिलकर पारी को संभाला और टीम को मुश्किल स्थिति से बाहर निकाला।

करुण नायर के साथ महत्वपूर्ण साझेदारी ने गति बदल दी

तीन विकेट जल्दी गिरने के बाद विदर्भ पर भारी दबाव था। मालेवार और करुण नायर के सामने चुनौती थी कि वे केरल के आत्मविश्वास से भरे गेंदबाजों के खिलाफ पारी को संभालें। दोनों ने मिलकर 100 से ज्यादा रन की शानदार साझेदारी की, जिससे खेल का रुख बदल गया।

मालेवार ने शुरुआत में धैर्य दिखाया, खुद को हालात के अनुकूल बनाया और दबाव का सामना किया। जैसे ही वे क्रीज पर सेट हुए, उन्होंने आत्मविश्वास से खेलना शुरू कर दिया। उन्होंने स्ट्राइक रोटेट की और खराब गेंदों पर अच्छे शॉट लगाए। दूसरी ओर, नायर ने उन्हें मजबूती से समर्थन दिया और दोनों ने मिलकर टीम को बिना किसी और नुकसान के लंच तक पहुंचाया।

ब्रेक के बाद मालेवार ने उसी एकाग्रता से खेलना जारी रखा। उन्होंने धीरे-धीरे रन बनाने की गति बढ़ाई, गेंदबाजों पर दबाव डाला और बेहतरीन शॉट खेले। उनका शॉट चयन शानदार था, और उन्होंने तेज और स्पिन दोनों गेंदबाजों को अच्छे से खेला।

सबसे खास पल तब आया जब वे 99 पर थे। उन्होंने बाएं हाथ के स्पिनर आदित्य सरवटे की गेंद पर छक्का लगाकर 99 से 105 रन पर पहुंच गए। इसके बाद, उन्होंने मिड-विकेट की ओर शानदार चौका लगाकर अपना शतक पूरा किया, जो उनके आत्मविश्वास और बेहतरीन बल्लेबाजी का सबूत था।

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रणजी ट्रॉफी के नॉकआउट चरण में मालेवार का प्रभाव

इस शतक ने मालेवार की पहचान घरेलू क्रिकेट के सबसे होनहार युवा बल्लेबाजों में से एक के रूप में और मजबूत कर दी। उन्होंने फाइनल से पहले भी नॉकआउट मैचों में शानदार प्रदर्शन किया था।

तमिलनाडु के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में, उन्होंने पहली पारी में 75 अहम रन बनाए, हालांकि दूसरी पारी में बिना खाता खोले आउट हो गए। मुंबई के खिलाफ सेमीफाइनल में, उन्होंने फिर दबाव में अच्छा खेल दिखाया। पहली पारी में 79 रन बनाए और दूसरी पारी में 29 रन जोड़कर टीम को मुकाबले में बनाए रखा। अब फाइनल में, केरल के खिलाफ उन्होंने फिर से शानदार बल्लेबाजी की और अपने युवा करियर की सबसे अहम पारी खेली।

 

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