शर्मिला टैगोर ने सैफ अली खान को लिखे ईसीबी के पत्र का खुलासा किया
यह प्रतिष्ठित ट्रॉफी, जो उनके दिवंगत पति और महान क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी के सम्मान में रखी गई है, 2007 से इंग्लैंड में भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज़ के विजेता को दी जाती है। पटौदी ट्रॉफी को बंद करने की खबरों ने कई तरह की प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं। हालांकि BCCI ने इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ECB ने सैफ अली खान को इस फैसले की जानकारी दे दी है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए टैगोर ने निराशा जताई और कहा कि उन्हें कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली, लेकिन “ECB ने सैफ को एक पत्र भेजा है, जिसमें लिखा है कि वे ट्रॉफी को रिटायर कर रहे हैं। अगर BCCI टाइगर पटौदी की विरासत को याद रखना या अनदेखा करना चाहता है, तो यह उनका फैसला है।”
भारत और इंग्लैंड के बीच पटौदी ट्रॉफी का इतिहास और महत्व
पटौदी ट्रॉफी की शुरुआत 2007 में भारत और इंग्लैंड के बीच 1932 में खेले गए पहले टेस्ट मैच की 75वीं वर्षगांठ के जश्न के रूप में हुई थी। यह ट्रॉफी इंग्लैंड में भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज़ के विजेता को दी जाती है और दोनों देशों की क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता का प्रतीक रही है।
हालांकि, जब दोनों टीमें भारत में खेलती हैं, तो सीरीज एंथनी डी मेलो ट्रॉफी के लिए होती है, जिसका नाम बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष के सम्मान में रखा गया है। इन दो ट्रॉफियों से दोनों क्रिकेट बोर्ड अपनी ऐतिहासिक विरासत बनाए रखते हैं। अगर पटौदी ट्रॉफी को सच में बंद कर दिया जाता है, तो यह भारत-इंग्लैंड क्रिकेट इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत होगा।
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मंसूर अली खान पटौदी की विरासत
पटौदी को भारत के सबसे प्रभावशाली और करिश्माई क्रिकेट कप्तानों में से एक माना जाता है। महज 21 साल की उम्र में भारतीय टीम की कमान संभालते हुए, उन्होंने खासतौर पर विदेशी धरती पर टीम के खेलने के तरीके में बड़ा बदलाव किया। एक दुर्घटना के कारण एक आंख की रोशनी खोने के बावजूद, उन्होंने अपने शानदार जज़्बे और नेतृत्व कौशल से क्रिकेट जगत में बड़ा सम्मान हासिल किया।
पटौदी ने भारत के लिए 46 टेस्ट मैच खेले और 34.91 की औसत से 2,793 रन बनाए। उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 203 रन था। उन्होंने अपने करियर में 6 शतक और 16 अर्धशतक लगाए। उनकी कप्तानी ने भारतीय टीम को विदेशी धरती पर बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया और टेस्ट क्रिकेट में भारत की सफलता की नींव रखी।
2011 में फेफड़ों के संक्रमण की जटिलताओं के कारण उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी विरासत आज भी क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में ज़िंदा है। भारतीय टीम 20 जून 2025 से इंग्लैंड में पांच टेस्ट मैचों की सीरीज़ खेलने के लिए तैयार है, और अब सबकी नज़रें BCCI और ECB की उस आधिकारिक घोषणा पर हैं, जिससे पटौदी ट्रॉफी का भविष्य तय होगा।