पंजाब किंग्स के यूट्यूब चैनल पर साहिबा बाली के पॉडकास्ट में बात करते हुए शशांक ने मुंबई के क्रिकेट सर्कल को छोड़ने के पीछे की वजहें साफ कीं। उन्होंने बताया कि मुंबई के चुनौतीपूर्ण घरेलू माहौल में उन्होंने अपने खेल को निखारा और वहीं लिस्ट ए और टी20 में डेब्यू भी किया, लेकिन उन्हें लाल गेंद वाले क्रिकेट में लगातार मौके नहीं मिल पा रहे थे। मुंबई की टीम का मिडल ऑर्डर पहले से ही शानदार खिलाड़ियों से भरा हुआ था – जैसे सूर्यकुमार यादव, अजिंक्य रहाणे, श्रेयस अय्यर, सरफराज खान और शिवम दुबे – जो सभी अपने करियर के बेहतरीन दौर में थे। इतनी कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते शशांक को अपनी क्षमता दिखाने का ज्यादा मौका नहीं मिल पाया।
शशांक ने कहा, “नहीं, सच्चा मौका नहीं मिल रहा था क्योंकि प्रतियोगिता बहुत कड़ी थी। मेरी अंत सच से है बात तो नहीं, जाहिर है, क्योंकि जब मैं कोशिश कर रहा था बॉम्बे की रेड बॉल टीम में जो रणजी ट्रॉफी बोलते हैं हम लोग उसमें आने का तो जाहिर तौर पर मेरी प्रतिस्पर्धा थी श्रेयस, शिवम दुबे, पृथ्वी आ गया था, सरफराज था, सिद्धेश लाड था और देखो अच्छा है टीम थी। हर कोई प्रदर्शन कर रहा था, तो कितने लोग मैंने देखे हैं, मुझे नाम नहीं लेना है लेकिन कितने लोग बोले हैं, अबे राजनीति थी वहां पे, अबे ये था, वो मेरे साथ कुछ भी ऐसा नहीं था।”
शशांक ने यह भी साफ किया कि मुंबई क्रिकेट सिस्टम में राजनीति की जो अफवाहें हैं, वो उनके अनुभव में सच नहीं थीं। उन्होंने अपने अनुभव को सकारात्मक और स्वागत योग्य बताया। हालांकि, उन्होंने यह जरूर माना कि उस टीम में जगह बनाना मुश्किल था जहां खिलाड़ी लगातार अच्छा खेल रहे थे। उन्होंने इंटरव्यू में कहा, “अगर कोई लगातार शतक बना रहा है, तो आप उसे मेरे साथ खेलने के लिए क्यों छोड़ेंगे?” उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि उन्हें मौके की कमी पक्षपात की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए थी क्योंकि मुंबई के खिलाड़ी हर फॉर्मेट में बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे थे।
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घर वापस जाने का भावनात्मक निर्णय
शशांक के लिए मुंबई छोड़ना कोई आसान फैसला नहीं था। उन्होंने बताया कि इस फैसले को लेकर वह बहुत भावुक थे, और जब उन्होंने डीवाई पाटिल स्पोर्ट्स अकादमी में अपने गुरु से इस बारे में बात की, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए थे। उनके गुरु ने उन्हें सलाह दी कि उन्हें अपने करियर को लेकर व्यावहारिक बनना होगा और यह भी कहा कि अगर वह मुंबई में ही रहते हैं, तो बिना किसी खास प्रगति के लाल गेंद वाले क्रिकेट में उनके कई साल बर्बाद हो सकते हैं। इस सलाह को मानते हुए शशांक ने अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ लौटने का फैसला किया।
इस फैसले से उन्हें तीनों फॉर्मेट – लाल गेंद, सफेद गेंद और टी20 – में खेलने के ज्यादा मौके मिले। इसके अलावा, उन्हें बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में ऊपरी क्रम में खेलने का भी ज्यादा अवसर मिला। उनका यह फैसला सही साबित हुआ, क्योंकि उन्हें घरेलू क्रिकेट में अच्छी सफलता मिली और इसके साथ ही आईपीएल में भी उन्हें एक बड़ा मंच मिला।
पंजाब किंग्स के साथ शशांक का नया अध्याय
शशांक की यात्रा ने एक नया मोड़ तब लिया जब आईपीएल नीलामी के दौरान पंजाब किंग्स ने उनकी क्षमता को पहचाना। एक ही नाम वाले दूसरे खिलाड़ी के साथ हुई गड़बड़ी के कारण उनके चयन को लेकर शुरुआत में कुछ असमंजस जरूर हुआ, लेकिन इसके बावजूद पंजाब किंग्स ने उन पर भरोसा बनाए रखा। शिखर धवन की कप्तानी में, शशांक ने आईपीएल 2024 में शानदार प्रदर्शन किया और अब 2025 में भी एक और प्रभावशाली सीज़न के लिए तैयार हैं।
अपने करियर की दिशा के बारे में सोचते हुए, शशांक ने खुद पर भरोसे और घरेलू क्रिकेट की कठिन प्रणाली को इसका श्रेय दिया कि वह आज जिस मुकाम पर हैं, वहां तक पहुंच पाए। उन्होंने पंजाब किंग्स द्वारा दिए गए मौकों के लिए आभार जताया और कहा कि वह टीम की सफलता में अपना पूरा योगदान देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।